किराना घराना ( गायकी )- विशेषता Kirana Gharana

किराना घराना in Hindi • किराना घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत की गायन परम्परा का एक प्रसिद्ध घराना है । इस घराने के प्रतिनिधि गायक अब्दुल करीम खाँ थे ।

किराना घराना के संस्थापक कौन थे ?

अब्दुल करीम खाँ व वहीद खाँ को इस घराने का संस्थापक कहा जाता है ।

किराना घराना किस स्थान से संबंधित है ?

किराना घराने का नामकरण उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक तहसील कस्बा किराना से हुआ है । यह स्थान उस्ताद अब्दुल करीम खाँ का जन्म स्थल है ।

किराना घराना का नामांकरण ” किराना ” कैसे पड़ा ?

• डॉ . मधुबाला सक्सेना के अनुसार , ” किराना घराने के संस्थापक उस्ताद अब्दुल करीम खाँ साहब का निवास स्थान उत्तर प्रदेश में कैराना नामक ग्राम होने के कारण उनका घराना , किराना घराना कहलाया ।

किराना घराना

इस घराने के मूल पुरुष सुप्रसिद्ध बीनकार बन्दे अली खाँ साहब को माना जाता है । ये गुलाम तकी नामक किराना के एक प्रसिद्ध बीनकार के पोते थे । इनकी शिष्य परम्परा के पश्चात् ही अब्दुल करीम खाँ साहब हुए । वास्तविकता यह मानी जाती है कि यह घराना सारंगी वादकों का था , जिसमें पहले सारंगी का अभ्यास अधिक हुआ तत्पश्चात् गायन अंगीकार किया गया , इसी कारण अब्दुल करीम खाँ व वहीद खाँ को इस घराने का संस्थापक कहा जाता है ।

अब्दुल करीम खाँ साहब ने संगीत की तालीम अपने वालिद काले खाँ और चाचा अब्दुल्ला खाँ से पाई थी । अब्दुल करीम खाँ के गुरु अब्दुल रहमान खाँ इसी घराने की शिष्य परम्परा में थे ।

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विशेषताएँ – किराना घराना

किराना घराने की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

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  • उस्ताद अब्दुल करीम खाँ द्वारा स्थापित इस घराने की विशेषताओं का जब हम विश्लेषण करते हैं , तब यह स्पष्ट होता है कि इस घराने के प्रमुख बीन वादक उस्ताद बन्दे अली खाँ के वादन में प्रमुख सौन्दर्य का इस घराने पर विशेष प्रभाव रहा ।
  • बीन वादक के सौन्दर्य तत्त्वों की कल्पना से प्रेरणा लेकर ख्याल गायिकी का आविष्कार करने वाले महान् कलाकार साहब करीम खाँ द्वारा इस घराने ने प्रतिष्ठा पाई ।
  • इस घराने की गायिकी हिन्दुस्तानी संगीत जगत में अपना विशेष स्थान रखती है । इस घराने की गायिकी आलाप प्रधान है ।
  • राग के कुछ महत्त्वपूर्ण स्वरों को व्यापक रूप से विस्तृत करके गायन करना इस घराने की महत्त्वपूर्ण विशेषता है ।
  • यह घराना व इसकी गायिकी तन्त्र वीणा वादन के की वाद्यों पर आधारित है , इसलिए हर राग की बढ़त वीणा वादन के ढंग से , स्वरों की विभिन्न भावपूर्ण ढंग से बढ़त की जाती है ।
  • • मूलतः बीनकारों का घराना होने के कारण विलम्बित लय , स्वर की दीर्घता , एक स्वर से दूसर स्वर तक जाते समय स्वर को मीन्ड की भांति टूटने न देना , सुरीलापन तथा भक्ति – भाव युक्त आलापचारी इस गायिकी की प्रमुख विशेषताएँ हैं । डॉ . शन्नो खुराना के अनुसार , ” सुर का लगाव ही इस घराने की विशेषता है । ” 
  • ठुमरी गाने की प्रथा की विशेषता इस घराने में दृष्टिगोचर होती है । सरगम से राग का अत्यधिक विस्तार करना , इस घराने का विशेष गुण या पहचान बन गया है ।
  • • इस घराने के संगीतज्ञों के अनुसार स्वर को गायिकी की आत्मा माना गया है ।
  • • इसमें भाव की अपेक्षा बोल – बाँट को अधिक महत्त्व दिया गया है ।

प्रमुख कलाकार

इस घराने के प्रमुख कलाकारों की सूची में कई महान् व बड़े – बड़े धुरन्धरों के नाम शामिल किए गए , जिनके तेज प्रभाव व स्वर उच्चारण के वैचित्र्य ने किराना घराने को अग्रसर करने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ; जैसे – मूल पुरुष बीनकार बन्दे अली खाँ साहब , करीम खाँ जी , करीम खाँ जी के प्रमुख शिष्य – हीराबाई , संवाई गन्धर्व , विश्वनाथ जाधव , दशरथ मुले , बेहरे बुआ , बन्नू बाई ( खाँ साहब की पत्नी ) हरिश्चन्द्र कपिलेश्वरी , शंकर कपिलेश्वरी आदि ।

इस घराने के अन्य गायकों में पण्डित भीमसेन जोशी , फिरोज दस्तूर , डॉ . देशपाण्डे , गंगू बाई हंगल , स्व . रजब अली खाँ , उस्ताद अमीर खाँ पाकिस्तानी सुप्रसिद्ध गायिका रोशन आरा बेगम इत्यादि के नाम हैं ।

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Conclusion / निष्कर्ष

डॉ . सुशील कुमार चौबे के अनुसार , प्रायः लोग स्व . अब्दुल करीम खाँ साहब को इस घराने की गायिकी का जन्मदाता और लोकप्रिय विचारक मानते हैं , किन्तु इस घराने के बड़े सर्वश्रेष्ठ गायक बहरे वाहीद खाँ थे । करीम खाँ जी ने अपने शब्दों में किराना जगह का जो परिचय दिया वह इस प्रकार सारांशित है

“ ज्याला आपण कुरु क्षेत्रम्हाणतो त्या शहराचे नावं किराना असे ओह । ”

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• डॉ . प्रभा अत्रे के अनुसार , “ सुरों का सौन्दर्य , शान्तता , मिठास विलम्बितता , भावना प्रधानता इसकी प्रमुख विशेषता है । इस गायिकी में लयकारी एवं मात्रा का हिसाब अन्य से अल्प होते हुए भी स्वर की ताकत पर यह गायिकी श्रोताओं के मन को मोहने की क्षमता रखती है । ”

बीनवादकों की इस घराने में परम्परा – बद्धता होने के कारण का एकमात्र श्रेय इसके प्रतिनिधि कलाकार हैं ।

अतः निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि यह गायिकी आलाप , स्वर तथा भावप्रधान है । स्वर के सन्दर्भ में यह महीन व सुरीली है , सूक्ष्मता धारण किए हुए है , साथ ही ठुमरी के अंग से ख्याल को निभाना भी इसी घराने का प्राण तत्त्व है । 

पटियाला घराना ( गायकी ) Patiala Gharana

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