शारदा राजन आयंगर – Biography फिल्मफेयर विजेता 1970

शारदा राजन आयंगरएक गुमनाम सितारा (sharda-rajan-iyengar – Biography )

शारदा राजन आयंगर ( sharda rajan iyengar ) का “तितली उड़ी उड़ जो चली फूल ने कहा आजा मेरे पास तितली कहे मैं चली आकाश” का यह प्रसिद्ध गीत । लेकिन इस गीत को गाने वाली गायिका आज गुमनामी के पन्नों में खो गई है । एक ऐसी दास्तान जिसे किसी ने दुनिया के सामने लाना बिलकुल भी जरूरी नहीं समझा ।

इसीलिए तो कहते हैं – लोग सिर्फ उगते सूरज को सलाम करते हैं, डूबते सूरज को कोई पूछता तक नहीं । वह सूरज जिसने अपने डूबने तक जलकर दुनिया को रोशन किया ।

जी हां यह कहानी अपने जमाने की मशहूर गायिका शारदा राजन अयंगर की। गाना – सांवरा सलोना शाम रंग वाला सारे जगत को मगन कर डाला । इनका जन्म हुआ 25 अक्टूबर 1937 को तमिलनाडु के एक ब्राह्मण प्राय परिवार में हुआ ।

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संगीत के प्रति शारदा राजन आयंगर का रुझान

बचपन में इनके घर में एक रेडियो तक नहीं था । लेकिन तब भी संगीत के प्रति इनका ऐसा रुझान आश्चर्यचकित करता है ।

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शारदा राजन आयंगर जी जब घर के बाहर निकलती रेडियो पर बजने वाले गानों को बड़े ध्यान से सुना करती थीं । वहीं से इनके मन में संगीत के प्रति गहरा प्रेम उत्पन्न हुआ । जो गाना वह बाहर से सुन कर आती उन्हीं गानों को अक्सर यह अपने घर में गुनगुनाया करती थी । यूँ तो वो तमिल से ताल्लुक रखती थी पर उन्हें हिंदी गानों के प्रति ख़ास आकर्षण रहा ।

संगीत शिक्षा की शुरुआत

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एक दिन उनकी मां ने नहाते हुए शारदा राजन आयंगर को गाते हुए सुना तो वह हैरान हो गयी । उन्होंने सोचा क्यों ना इसे संगीत की शिक्षा दिलाई जाए । बाद में उन्होंने अपने परिवार की आज्ञा से कर्नाटक संगीत की ट्रेनिंग ली । धीरे-धीरे उन्हें अपनी सुरीली आवाज से ख्याति मिलने लगी। गाना – सुन सुन रे पवन दिल तुझको पुकारे । अब पब्लिक प्लेटफॉर्म पर इनको गाने का काफी मौका मिलने लगा ।

अब एक ऐसा दिन भी आया जिसने इनकी किसमत पलट कर रख दी । हुवा यूँ कि ईरान देश में एक संगीत समारोह में राज कपूर साहब ने इन्हें गाते हुए सुना । हालांकि साउथ इंडियन होने की वजह से शारदा राजन आयंगर जी का हिंदी उच्चारण उतना अच्छा तो नहीं था । लेकिन तब भी राज कपूर साहब इनकी आवाज से काफी प्रभावित हुए । राज कपूर ने इनसे कहा आप अच्छा गाती हैं । आपको मुंबई आकर फिल्मों में ट्राई करना चाहिए ।

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शारदा राजन आयंगर का मुंबई में पहला कदम

कुछ समय बाद शारदा जब मुंबई पहुंची तो यह जानकर खुशी का ठिकाना ना रहा कि राज कपूर उन्हें याद रखे हुए थे । राजकपूर ने उन्हें झट से पहचान लिया । उसके बाद उन्होंने शारदा से एक गीत गवाया जो सबको बहुत पसंद आया । शंकर जयकिशन जोड़ी के शंकर ने शारदा राजन आयंगर के शोख़ और कमसिन आवाज का इस्तेमाल अपनी संगीत में एक अलग सेठ देने के लिए करने का मन बना लिया ।

शंकर जयकिशन ने इन्हें संगीत की बारीकियां सिखाने के लिए बकायदा ट्रेनिंग दिलाई । फिर वह दिन भी आया जब शंकर जयकिशन ने फिल्म सूरज के लिए दो गीत गवाए “तितली उड़ी” और देखो मेरा मन मचल गया । जिसने भी यह गीत सुने वह शारदा की गीतों पर फिदा हो गया। लोगों ने इस गीत को काफी ज्यादा पसंद किया । वैसे इनका यह गाना आज भी लोगों को पसंद है ।

लेकिन यह इत्तेफाक था कि सूरज से पहले मनोज कुमार और नंदा स्टारर फिल्म गुमनाम रिलीज हो गई। इसमें शारदा राजन आयंगर का मोहम्मद रफी के साथ गाया गीत – ‘ जाने चमन शोला बदन पहलू में आ जाओ ‘ भी शामिल था । लेकिन सूरज के गाने -“किस औरत ने शोहरत ” ने शारदा को रातों-रात स्टार बना दिया। आलम यह हुआ कि__

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शारदा राजन आयंगर और फिल्मफेयर अवार्ड

उस साल के फिल्म फेयर अवार्ड के लिए तितली उड़ी और और रफी साहब के गाए गीत बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है दोनों गानों को बराबर वोट मिले । उन दिनों प्लेबैक सिंगर की कैटेगरी में पुरुष और महिला की आवाजों के लिए एक ही अवार्ड होता था । उस साल का अवार्ड मोहम्मद रफी साहब को मिला था । लेकिन शारदा को भी एक स्पेशल अवार्ड दिया गया ।

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इसके साथ ही शारदा जी ने इतिहास रच दिया । अबतक जो नहीं हुआ था वो हुआ । अगले साल से फिल्म फेयर ने पुरुष और महिला गायकों के लिए अलग-अलग अवार्ड देना शुरू किया । इनके गाये गानों को लगातार 4 वर्षों तक फिल्मफेयर अवार्ड्स में नामांकित किया गया ।

फिल्म – ‘ जहां प्यार मिले ’ के गीत ‘ बात जरा है आपस की…’ के लिए फिल्मफेयर अवाॅर्ड अपने नाम किया ।  

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आवाज़ की आलोचना

1967 में शंकर जयकिशन के संगीत से सजी फिल्म आई ‘अराउंड द वर्ल्ड ‘ । इस फिल्म में शारदा राजन आयंगर के आवाज के जादू ने फिर कमाल कर दिया । गाना – ” चले जाना जरा ठहरो किसी का दम निकलता है ये मंजर देखते जाना ” शारदा के गाए गीतों की तारीफ तो हुई । मगर उनकी आवाज की काफी आलोचना भी होने लगी ।

कहा गया कि शारदा की आवाज बेकार, इतनी अच्छी नहीं है । लेकिन शंकर ने किसी की बातों पर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया । उन्हें शारदा की काबिलियत पर पूरा भरोसा था । वह लगातार शारदा को मौके देते जा रहे थे । अंततः उनके भरोसे ने रंग दिखाया और जिस दौर में लता,आशा भोसले और सुमन कल्याण ज्यादातर हीरोइनों के लिए गाने गा रही थी ।

उसी दौर की फिल्म जहां प्यार मिले’ के गीत ‘ बात जरा है आपस की…’ के लिए फिल्मफेयर अवाॅर्ड अपने नाम किया ।  

फिल्म जगत में राजनीति का सिलसिला

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और कब शुरू हुआ इनके प्रति फिल्म जगत में राजनीति का सिलसिला । हैरत इस बात की है कि महज 20 गाने गाने के बाद फिल्म फेयर अवार्ड अवार्ड हासिल करने वाली शारदा को शंकर जयकिशन के अलावा ज्यादातर उषा खन्ना ने हीं मौका दिया । उस समय की ज्यादातर अभिनेत्रियां लता या आशा की आवाज में अपने गाना गवाना चाहती थी । शारदा के नाम पर यह मुहर लग गई कि उनकी आवाज तो सिर्फ शंकर ही इस्तेमाल करते हैं ।

nepotism – भाई- भतीजावाद

जैसे-जैसे वक्त गुजरता गया शारदा के लिए हालात कठिन होते गए । फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर पर यह दबाव पड़ने लगी । किशोर दा के गाए गाने फिल्म से हटा दिए जाएं । शारदा राजन आयंगर से गाने तो गवा लिए जाते थे, लेकिन फिल्म रिलीज होने तक वह गाने फिल्म से बाहर कर दिए जाते थे । मेरा नाम जोकर में इनसे 3 गाने गवाए गए लेकिन यह गाने फिल्म में शामिल नहीं किए गए और भी कई फिल्में रही जिनमें इनके गाने शामिल नहीं हुए ।

इसके बावजूद शारदा संगीत में डूब कर लगातार रियाज करती रहीं। फिल्मी दुनिया में शारदा का ना तो कोई गहरा दोस्त था, ना ही सहारा । सिर्फ एक जयशंकर ही थे जिनका संरक्षण उन्हें हमेशा मिलता रहा । मगर दूसरे बड़े संगीतकार गाने का मौका देने से कतराते रहे । इस राजनीति ने शारदा राजन आयंगर को बड़ी बुरी तरह से परेशान कर दिया । उनकी आवाज से दुश्मनी रखने वाला या वाली जो भी हो वह कभी सामने नहीं आया इसलिए दोष भी देती तो किसको देती । वह हारना नहीं चाहती थी ।

शारदा राजन आयंगर के खुद के गीतों का प्रयोग

वे रुकने वाली नहीं थी अतः उन्होंने नया अवतार ले लिया और खुद को संगीतकार के रूप में गिनना शुरू किया । उन दिनों निजी गीतों का बाजार अस्तित्व में नहीं आया था । फिल्मी गीतों के अलावा या तो भजन गीत जारी किये जाते थे या फिर गजल या कव्वाली गीत जारी किये जाते थे

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शारदा ने खुद के आठ गीत तैयार किए जिसे एचएमवी ने जारी किया । शारदा राजन आयंगर का यह नया प्रयोग प्रचलित जरूर हुआ लेकिन उन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली । शायद तब भारत में पाप गानों के लिए माहौल नहीं बन पाया था । कहा जाये तो ये समय से आगे की गाने को प्रस्तुत कर रहीं थी । शायद इसलिए यह प्रयोग इतना सफल नहीं हुआ । ये उनकी दूरदर्शिता का एक प्रमाण है ।

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B ग्रेड फ़िल्में

पॉप गाने के इस प्रयोग से शारदा राजन आयंगर को फायदा यह हुआ कि कम बजट में बनने वाली फिल्मों के प्रोड्यूसर उनके पास आने लगे । मां बहन और बीवी जैसी कुछ फिल्मों में उन्होंने अपना संगीत दिया । संगीतकार के रूप में शारदा को केवल बी ग्रेड फिल्में ही मिली । इसका असर कुछ ऐसा हुआ जो उनके करियर को आगे नहीं बढ़ा सके, उनके करियर में रुकावट का दौर ला दिया ।

अलविदा बॉलीवुड

बावजूद इसके वो हालात का बहादुरी से मुकाबला कर रही थी । पर नीति को कुछ और मंजूर था । शारदा राजन आयंगर के लिए साल 1987 बहुत ही बुरी खबर लाया । फिल्मी दुनिया में उनका इक मात्र सहारा यानी शंकर ने दुनिया से विदा ले लिया । अभीतक किसी अन्य संगीतकार से कुछ अच्छा काम न मिल पाया था, शायद आगे किसी और संगीतकार से काम न मिल पाने का उनके मन का विचार । शारदा को यकीन होने लगा कि उन्हें गाना गाने के लिए मौके शायद नहीं मिल पाएंगे और फिल्म जगत से, फिल्म संगीत से किनारा कर लिया ।

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दर्द की इन्तहा

मत पूछ मेरे दर्द की इन्तहा कहाँ तक है , तू कोशिश करले तेरी ताकत जहाँ तक है । तू बेगैरत है, ये तो मालूम है मुझे , देखना अब ये है, तू बेदर्द कहाँ तक है ।

ये बात इनपर सटीक बैठती है । लेकिन कबतक ? आखिर कबतक ?

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लंबे वक्त तक फिल्मी दुनिया की सियासत से डटकर मुकाबला करने वाली शारदा राजन आयंगर की कमसिन, शोख़ और अल्हड़ आवाज की आखिरकार फिल्मों से विदाई हो गई।

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गाना – मन के पंछी कहीं चल दूर चल इस चमन में तो अपना गुजारा नहीं

https://www.youtube.com/watch?v=SKzdOJWPKRo

आज भी शारदा राजन आयंगर उन लोगों का नाम कभी नहीं लेती जिन्होंने फिल्मी दुनिया में उनके पैर कभी जमने नहीं दी । उनकी आवाज में ऐसे लोगों के प्रति ज़रा भी कड़वाहट नहीं थी, लेकिन आंखों से झलकता दर्द को वो छिपा नहीं पाती थी ।

अगर आपने इनके गाने सुने हैं, तो मै निश्चित कह सकता हूँ कि आपके पसंदीदा गानों में इनके गाने जरूर शामिल होंगे । आज भी हम इनके गाये गाने बड़े ही चाव से सुनते हैं । इनका भारतीय संगीत में योगदान अविश्मरणीय है । इस महान हस्ती ( शारदा राजन आयंगर ) को संगीत के प्रति इनके इतने योगदान के लिए कोटि – कोटि नमन । 🙏

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ये रही शारदा राजन आयंगर के कुछ गानों की सूची …..

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चले जाना ज़रा ठहरो – Around the World · 1967
तितली उडी उड़ जो चली –  Suraj -1966
देखो मेरा दिल मचल गया   – Suraj · 1966
जाने चमन शोला बदन – Gumnaam · 1965
मस्ती और जवानी हो – दिल दौलत दुनिया · 1972
हेलो हेलो सुन सुन सुन – प्यार मोहब्बत · 1966
तेरे अंग का रंग
तेरे सिवा कौन है मेरा – Pyar Mohabbat · 1966
आपके पीछे – एक नारी एक ब्रह्मचारी · 1971
बात ज़रा
मेरा नाम है फ़्लोरी –  प्यार का रिश्ता (Original Motion Picture Soundtrack) · 1972
आएगा कौन यहाँ –  गुमनाम · 1965
मैं तो चली हूँ वहां –  बे – ईमान · 1972
ख़ुशी के रंग में – 
Kallallo Kallupetti Choodu  –  Jeevitha Chakram · 1971
होटल में बोतल   –  बॉम्बे डिस्को 2 · 2014
मिलान की रात है ख़ुशी के रंग में   –  हरे कांच की चूड़ियां · 1967
धीरे धीरे मेरे   – द गोल्ड मैडल · 2006
Madhurati Madhuram  –  The King of Melody – Ghantasala Hits · 2018
तुम्हारी भी जय जय   –  दीवाना (1967 film)
ले जा ले जा मेरा दिल   – An Evening in Paris · 1967
Kanti Choopu Chepthondi  –  Jeevitha Chakram · 1971
कहाँ चला रे
Kuchi Kuchi Rakkamma  – 1998
लेजा दिल है तेरा लेजा
जाने अनजाने   –  1971
हाय कहाँ चला रे , वहां तेरा कौन   –  हरे कांच की चूड़ियां · 1967
बात ज़रा है आपस की Part 2  –  Doob Doob O’ Rama (Filmsongs From Bollywood) · 1999
Batkamma Batkamma ekkaDa pOtAv raa  –  Shatranj (Original Motion Picture Soundtrack) · 1969
तारों से प्यारे   –  दीवाना (1967 film)
बात ज़रा है आपस की , Pt. 1  –  Doob Doob O’ Rama· 1999
तुम प्यार से देखो   –  Doob Doob O’ Rama 2:

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शारदा राजन आयंगर की तरह ही एक गुमनाम सितारा

पार्श्व गायिका हेमलता

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