पण्डित रविशंकर Biography in Hindi सितार वादक Pt. RaviShankar

विश्वविख्यात सितार वादक भारतरत्न पण्डित रविशंकर Biography

पण्डित रविशंकर Biography

  • विश्वविख्यात सितार वादक पण्डित रविशंकर का जन्म 7 अप्रैल , 1992 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ
  • इनके पिता श्याम शंकर विद्वान् थे तथा इन्होंने इंग्लैण्ड से ‘ बार एट लॉ ‘ और रविशंकर बाल्यकाल से ही संगीत की ओर आकर्षित हुए , क्योंकि इनके जेनेवा विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में अनेक उपाधियाँ प्राप्त की थी । भाई उदय शंकर , राजेन्द्र शंकर तथा ज्ञानेन्द्र शंकर संगीत के क्षेत्र में स्थापित हो चुके थे ।
  • बालक रवि को प्रारम्भ से ही गायन , वादन तथा नृत्य सीखने का अवस मिला । रविशंकर को ध्रुपद की शिक्षा अपने पिता से मिली तथा इनके बड़े भाई राजेन्द्र शंकर की ऑर्केस्ट्रा पार्टी से विभिन्न वाद्यों की ध्वनियों तथा उनकी वादन शैलियों से भी इनका परिचय हुआ । ।
  • इन्होंने नृत्य की शिक्षा अपने बड़े भाई प्रसिद्ध नृत्यकार उदयशंकर से प्राप्त की तथा उनके दल के साथ विश्व भ्रमण किया करते थे ।
  • पण्डित रविशंकर ने सितार की शिक्षा उस्ताद अलाउद्दीन खाँ से प्राप्त की ।
  • कला की दुनिया के इस साधक ने 11 दिसम्बर , 2012 को कैलिफोर्निया अमेरिक में अपनी अन्तिम साँस ली तथा भारत ने एक ऐसा अद्भुत सितारा खो दिया .. जिसने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को एक नया आयाम दिया ।

संगीत में योगदान

  • पण्डित रविशंकर ने अपना पहला सफल कार्यक्रम वर्ष 1939 में इलाहाबाद संगीत सम्मेलन में अली अकबर खाँ के साथ युगलबन्दी कार्यक्रम पेश करके किया । वर्ष 1941 में उस्ताद अलाउद्दीन खाँ ने अपनी पुत्री अन्नपूर्णा का विवाह रविशंकर के साथ कर दिया , जो प्रसिद्ध सुरबहार वादिक थीं ।
  • वर्ष 1934 से 1944 तक ये लखनऊ रेडियो से अपना कार्यक्रम प्रस्तुत रहे तथा वर्ष 1944 के बाद पत्नी अन्नपूर्णा व पुत्र श्री शुभेन्द्र शंकर के साथ मुम्बई आ गए ।
  • रविशंकर ने इप्टा ( इप्टा इंडियन पीपल थिएटर एसोसिएशन ) में प्रवेश किया , जिसके माध्यम से इन्हें बैले संगीत में कार्य करने का अवसर मिला । इसके बाद इन्हें दो फिल्मों में संगीत देने का भी अवसर मिला जिनमें फिल्म ‘ नीचा नगर ‘ और ‘ धरती का लाल ‘ थी ।
  • इन्होने इंडियन नेशनल थियटर के साथ मिलकर पण्डित जवाहरलाल नेहरू की प्रसिद्ध पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इण्डिया ‘ के लिए संगीत तैयार किया .
  • फ़रवरी , 1949 में रविशंकर दिल्ली में ऑल इण्डिया रेडियो के परेक्टर पद पर नियुक्त हुए । दिल्ली में रहते हुए ही इन्होंने ‘ झंकार ‘ नामक एक संगीत संस्था का निर्माण किया , जिसे आजकल ‘ भारतीय कला केन्द्र के नाम से जाना जाता है ।
  • वर्ष 1951 में रविशंकर को पाश्चात्य महान् संगीतज्ञ येहूदी मैन्यूहिन से मिलने का अवसर मिला तथा बाद में इनके साथ पण्डित रविशंकर के सितार व वायलिन की जुगलबन्दी के अनेक कार्यक्रम भी होते रहे ।
  • वर्ष 1966 में प्रमुख पाश्चात्य संगीतज्ञ बीटल हैरिसन ने पण्डित रविशंकर के पास आकर संगीत की शिक्षा ली ।
  • पण्डित रविशंकर ने उल्लिखित चलचित्रों के अतिरिक्त चार्ली , पाथेर पांचाली , अनुराधा , गोदान , गाँधी , काबुलीवाला , मीरा , फ्यूट एवं द ऐरो के लिए भी संगीत रचना की । गाँधी फिल्म को फिल्म अकादमी पुरस्कार के लिए नामित किया गया ।
  • पण्डित रविशंकर ने अपनी रचनात्मकता व कुशलता से अनेक नवीन रागों की भी रचना की , जिनमें जागेश्वरी , कामेश्वरी , रागेश्वरी , तिलकश्याम , नटभैरव , वैरागी , भैरव जनसम्मोहनी आदि हैं । इसके अतिरिक्त पण्डित रविशंकर ने अनेक दक्षिणात्य रागों को तथा अप्रचलित रागों को भी जनसामान्य में प्रचलित करने का कार्य किया है , जिनमें चारूकेशी वाचस्पति , सिंम्हेद्रमध्यम , फिरवाणी , जनसम्मोहनी , हेमावती , मलयामरूतम आदि ।
  • पण्डित रविशंकर ने तीन ग्रन्थ लिखे माई म्यूजिक माई लाइफ ( अंग्रेजी ) , राग- अनुराग ( बंगाली ) और रागमाला ( अंग्रेजी ) ।
  • वर्ष 1967 में इन्होंने लॉस एंजिल्स में ‘ किन्नर स्कूल ऑफ म्यूजिक ‘ स्थापित किया और ‘ वेस्ट मीट्स ईस्ट ‘ में येहूदी मेन्यूहिन के साथ र पर जुगलबन्दी की । ।
  • वर्ष 1970 में पण्डित रविशंकर ‘ कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स के संगीत विभाग के प्रमुख नियुक्त हुए और सितार व ऑर्केस्ट्रा कन्सर्टो के रचनाकार बनाने वाले प्रथम भारतीय संगीतज्ञ हुए । वर्ष 1971 में पण्डित जी के जीवन पर आधारित वृत्तचित्र ‘ राग ‘ का न्यूयॉर्क में प्रदर्शन हुआ ।
  • पण्डित जी ने वर्ष 1977-78 में बनारस में ‘ रिम्पा ‘ ( Research Institute Of Performing Arts ) नामक संगीत संस्था की स्थापना की एवं वर्ष 1982 में एशियाड के लिए इन्होंने ‘ सुस्वागतम् ‘ नाम से संगीत निर्देशन किया ।
  • पण्डित रविशंकर के वादन में अनेक विशिष्टताएँ हैं । भावपक्ष व कला पक्षका समन्वय इनकी प्रमुख विशेषता है । किसी भी राग को गहराई से प्रस्तुत करने व उसमें अपनी कल्पना शक्ति से स्वर विस्तार करने की अनूठी प्रतिभा इसके वादन में है.

सम्मान

  • पण्डित रविशंकर को संगीत में योगदान के लिए विभिन्न पुरस्कारों से भी नवाजा गया , जिनमें कुछ प्रमुख पुरस्कार निम्न हैं –
    • वर्ष 1962 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
    • वर्ष 1967 में पद्म भूषण सम्मान
    • वर्ष 1975 में संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप वर्ष
    • 1968 में विलबोर्ड मैगजीन ऑफ द ईयर अवार्ड
    • वर्ष 1981 में पद्म विभूषण सम्मान
    • वर्ष 1987-88 में कालिदास सम्मान ( मध्य प्रदेश सरकार )
    • वर्ष 1992 में रेमन मैग्सेसे अवार्ड
    • वर्ष 1999 में ‘ भारतरत्न ‘ सम्मान
    • वर्ष 2001 में नाइटहुड सम्मान ( ब्रिटेन से )
    • वर्ष 2002 में तीसरा ग्रैमी अवार्ड
  • इसके अतिरिक्त इन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा डॉक्टरेट को उपाधि से भी सम्मानित किया गया , जिनमें से कुछ प्रमुख हैं
    • वर्ष 1973 खैरागढ़ विश्वविद्यालय एवं रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय
    • वर्ष 1993 हॉवर्ड विश्वविद्यालय

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