वाद्य यंत्र के प्रकार वर्गीकरण Musical instrument’s Types- vadya yantra

वाद्य यंत्र के प्रकार तथा वर्गीकरण – यह देखें कि जब भारतीय शास्त्रीय संगीत की बात आती है, तो लोग मुखर संगीत कार्यक्रमों के बजाय वाद्य संगीत समारोहों में भाग लेने की ज्यादा संभावना रखते हैं। इस कारण से मैंने अपने इस अधयाय को ‘ भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों ‘ की खूबसूरत दुनिया में समर्पित करने की योजना बनाई है ।

विषय - सूची

वाद्य यंत्रों के प्रकार तथा वर्गीकरण / Musical Instruments Types and Classification.

संपन्न संगीत Complete MUSIC का मतलब क्या है ?

संपूर्ण जानकारी विस्तार से जानने के बाद संगीत वाद्य यंत्रो की अगर हम बात करें तो इनकी फेहरिस्त काफी लम्बी है। कई – कई तरह की भारतीय संगीत वाद्ययंत्र हैं और यदि मैं आपको उनमें से हर एक से परिचित करना चाहूं तो , मुझे लगता है कि मुझे ऐसा करने में उम्र लग जाएगी। हमें इस प्रकरण को इस “वाद्य यंत्र के प्रकार तथा वर्गीकरण” के अध्याय को समाप्त करने की भी आवश्यकता है। कहीं पर जाकर हमें अंततः इस लेख को समाप्त तो करना ही पड़ेगा। इसलिए मैं आपको उन उपकरणों से परिचित कराऊंगा जिनके भारतीय संगीत में अक्सर आने की संभावना है।

यदि आप संगीत के प्रति अपनी जानकारी बढ़ाने में इच्छुक हैं तो खुदको भारतीय शास्त्रीय संगीत में वाद्य यंत्र के विभिन्न प्रकार को समझने के लिए तैयार करें । आइये शुरू करते हैं, जानते हैं musical instrument classification के बारे में।

वाद्य यन्त्र कितने प्रकार के होते हैं ?

संगीत कला के प्रकार की भांति ही संगीत वाद्य यंत्रों के प्रकार को विभिन्न तरह से वर्गीकृत किया जा सकता है। इसके सरलतम रूप में जाने के लिए हमें भारतीय संगीत के मामले में सबसे अधिक स्वीकार्य वर्गीकरण ऋषि भरत का नाट्यशास्त्र द्वारा प्रस्तावित है। जिसमें चार श्रेणियों का उल्लेख है।

वाद्य यंत्र के चार प्रकार कौन से हैं?

चार श्रेणियों के वाद्य यंत्रों के प्रकार हैं –
1. तंतु वाद्य (String Instrument ) / CHORDOPHONES 
(a)तत (with frets) वाद्य
(b)वितत (without frets) वाद्य
2. सुषिर वाद्य ( Wind Instrument  ) / AEROPHONES 
3. अवनद्ध वाद्य ( CHARMAJ  / DRUMS  / MEMBROPHONES 
4. घन वाद्य ( IDIOPHONES )

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वाद्य यंत्र के प्रकार तथा वर्गीकरण परिभाषाएँ  

1. तंतु वाद्य (String Instrument ) / CHORDOPHONES 

पहला प्रमुख वाद्ययंत्रों के प्रकार तथा वर्गीकरण की श्रेणी तंतु वाद्य की है ।

पहला उपकरण जो उन्होंने कहा है, वह है तंतु वाद्य। ये वे वाद्य यन्त्र के प्रकार हैं जिनमें तार लगे होते हैं। पाश्चात्य संगीत अर्थात Western Music में इन्हें कॉर्डोफोन्स (chordophones) कहा जाता है। तानपुरा जो भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक ड्रोन(Drone) वाद्ययंत्र है। यह केवल एक ऐसा वाद्ययंत्र है जो इसे एक एकल प्रदर्शन(Solo Performance) के लिए नहीं बजाया जा सकता है ।

इसके आगे तंतु वाद्य को “ तत् वाद्य अथवा तार वाद्य और नखज वाद्य ” में वर्गीकृत किया जा सकता है।

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तत(frets) वाद्य

तत(frets) वाद्य – तत (frets) वाद्य वैसे वाद्यंत्र हैं जिसमे Frets होते हैं तथा जिन्हे हम अपने अँगुलियों के नाखूनों की मदद से बजाते हैं । तत् वाद्य यंत्र कौन-कौन से हैं ? तत (frets) वाद्य यंत्र के सबसे लोकप्रिय उदाहरण हैं – वीणा और सितार ।

तंतु वाद्य का एक और प्रकार है – वितत वाद्य

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वितत (without frets) वाद्य

वितत वाद्य – ये वैसे वाद्य यंत्र हैं जिसमे frets नहीं होते हैं । जैसे – सरोद

कुछ वाद्य बिना वितत (without frets) के वाद्ययंत्र होते हैं जो धनुषों (Bow) की मदद से बजाए जाते हैं। इसके लोकप्रिय उदाहरण हैं – सारंगी और वायलिन।

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क्या किसी उपकरण को बिना नाखूनों द्वारा , बिना उँगलियों से क्लिक किए या वास्तव में बिना धनुष(Bow) की मदद के बिना बजाया जा सकता है? जवाब है – हां बिलकुल।

संतूर – जोकि एक तत वाद्य अथवा तार वाद्य यंत्र है, जिसे चम्मच के आकार के हथौड़े से प्रहार करके बजाया जाता है।

2. सुषिर वाद्य ( Wind Instrument  ) / AEROPHONES 

दूसरी प्रमुख वाद्य यंत्रों के प्रकार तथा वर्गीकरण की श्रेणी सुषिर वाद्य की है ।

दूसरी प्रमुख वाद्य यंत्र के प्रकार की श्रेणी सुषिर वाद्य की है। पश्चिमी संगीत Western Music में इन्हे AEROPHONES कहा जाता है । सुषिर वाद्य ( Wind Instrument  ) / AEROPHONES  ऐसे वाद्ययंत्र होते हैं जिसे फूंक मारकर बजाया जाता है। वैसे सुषिर वाद्य यंत्र के नाम हैं उदहारण – शंख(Conch), जो एक प्राकृतिक सुषिर वाद्य यंत्र है। सबसे लोकप्रिय फूंक मारकर बजाया जानेवाला सुषिर वाद्य हैं – बांसुरी(Flute)। हिन्दुस्तानी बांसुरी जिसमे कोई भी रीड नहीं होती है। एक और वाद्ययंत्र है – शहनाई । शहनाई – यह एक ऐसा सुशिर वाद्य यंत्र है जिसमें दो रीड्स होते हैं।

कुछ समय बाद सामाजिक कार्य के दृष्टिकोण से एक नई श्रेणी सामने आई। इसमें ध्वनि का उत्पादन करने के लिए यंत्रवत् हवा को उड़ाने के लिए धौंकनी का इस्तेमाल किया गया । इसका एक उदहारण है – हारमोनियम

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3. अवनद्ध वाद्य / चरमज वाद्य

तीसरी प्रमुख वाद्य यंत्रों के प्रकार तथा वर्गीकरण श्रेणी अवनद्ध वाद्य/ चरमज वाद्य की है ।

जिन्हें पाश्चात्य संगीत के अनुसार drums/membrophones कहा जाता है । इस प्रकार के वाद्य यन्त्र में जानवरों की त्वचा की एक परत होती है जो ध्वनि उत्पादन में मदद करती है। यह हथेलियों और अंगुलियों का उपयोग करके बजाया जाता है । उदहारण – कर्णाटिक वाद्य यंत्र जैसे मृदंगम और खंजीरा । हमारे पास और भी हिंदुस्तानी वाद्ययंत्र उदहारण के रूप में हैं । जैसे – पखावज और तबला । कुछ ऐसे भी वाद्य यन्त्र हैं जिसमे वाद्ययंत्र की त्वचा को छड़ी या हथौड़े से टकराकर बजाया जाता है । जैसे – ढ़ोल और चोघड़ा(Dhol और Chaughada) । अवनद्ध

4. घन वाद्य ( IDIOPHONES )

चौथा वाद्य यंत्रों के प्रकार तथा वर्गीकरण की श्रेणी घन वाद्य की है ।

उन्हें वहाँ पश्चिमी संगीत के अनुसार idiophone कहा जाता है । इन उपकरणों का शरीर धातु तथा मिट्टी जैसी ठोस सामग्री से बना होता है । इन्हे मिलाने या tune करने की आवश्यकता नहीं होती है। इनका उपयोग साइड रिदम इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में किया जाता है । घन वाद्य यंत्र कौन-कौन से हैं ? इन इंस्ट्रूमेंट्स के प्रमुख उदाहरण कर्नाटिक इंस्ट्रूमेंट्स जैसे घटम (ghatam) और मोरशिंग (morsing) । कुछ और उदहारण है मंजीरा और करताल ।

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अगर आप निरीक्षण करते हैं तो आप पाते हैं कि Melodic Instrument या तो तंतु वाद्य या शुषिर वाद्य की श्रेणी में आते है । जबकि लयबद्ध वाद्ययंत्र (Rhythmic Instrument) यातो अवनध वाद्य या घन वाद्य की श्रेणी में आते हैं ।

वाद्य यंत्र के प्रकार तथा वर्गीकरण में हमें कुछ और वाद्ययंत्र को शामिल करने की आवश्यकता है – ये हैं –

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Electronic Musical Instrument

आप यह भी पूछ सकते हैं कि सिंथेसाइज़र और इलेक्ट्रॉनिक तानपुरा जैसे उपकरणों के बारे में क्या कहा जाए ? इसे हम किस श्रेणी में रखेंगे ?

जवाब है – हम उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की श्रेणी में वर्गीकृत कर सकते हैं। मुझे यकीन है कि अगर ऋषि भरत आज अगर मौजूद होते तो शायद वो भी इसका वर्गीकरण बिलकुल ऐसे ही करते ।

आशा करता हूँ ,अब आप भारतीय वाद्य यंत्र के प्रकार , वर्गीकरण , वाद्ययंत्र की आवाज़ों के बारे में जान चुके होंगे ।

क्या आप जानते हैं ?????

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प्राचीन काल में वीणा शब्द का उपयोग सभी मेलॉडिक इंस्ट्रूमेंट को दर्शाने के लिए किया जाता था । मानवीय आवाज को वीणा के प्रकार के रूप में माना जाता था और इन्हे कहा जाता था –

गात्र वीणा = Bodily Veena और दैवी वीणा = God  Gifted  Veena .


आज के इस अध्याय में इतना ही । आशा करता हूँ यह आपके लिए जानकारी भरा होगा । आपके संगीत के ज्ञान में कुछ बढ़ोतरी इस लेख के माध्यम से जरूर हुई होगी ।

इसे भी पढ़ें –

Musical Definition / संगीत से जुड़ी महत्वपूर्ण शब्द तथा उनकी परिभाषाएं

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