पेशकार किसे कहते है ? What is Peshkar in Music ?

पेशकार किसे कहते है ?

संगीत में पेशकार किसे कहते है ? What is Peshkar in Music ? पेशकार – ठेके के विकसित रूप को हम ‘ पेशकार ‘ के नाम से जानते हैं । पेशकार का स्वरूप ठेके के स्वरूप से मिलता – जुलता होता है , इसलिए इसे ठेके का अधिक विकसित रूप कहा जाता है । पेशकार ‘ के बोल कायदे के बोलों से मिलते – जुलते होते हैं , परन्तु कायदे के बोलों की अपेक्षा इसके बोलों में जटिलता अधिक पाई जाती है ।

पेशकार का अर्थ

पेशकार का तात्पर्य ‘ पेश करने से लगाया जाता है । ‘ पेश करना ‘ अर्थात् सभा के समक्ष साधना व कला के विविध अंगों को रचनात्मकता के साथ पेश करने की महत्त्वपूर्ण कला पेशकार कहलाती है । इस रीति द्वारा किसी भी रचना को पेश करने को पेशकार कहा जाता है ।

पेशकार के साथ वैसे तो रंजकता , रोचकता व आकर्षण बनाए रखने हेतु विभिन्न लयों को इसके साथ जोड़ लिया जाता है , परन्तु बोलों की जटिलता के कारण पेशकार को मध्यलय में बजाया जाता है , लेकिन सौन्दर्य वृद्धि हेतु इसमें लय के अन्य टुकड़ों को सम्मिलित कर पेश किया जाता है ।

प्राय : एकल वादन के प्रारम्भ में पेशकार बजाया जाता है । कुछ विद्वानों का मानना है कि पेशकार को प्रस्तुत करते समय ताल के अन्तिम विभागों में बोलों की चाल में परिवर्तन आ जाता है ।

पेशकार शब्द पेश से बना है तबके के सन्दर्भ में तबला वादन के स्वरूप को पेश करना पेशकार कहलाता है । वास्तव में , पेशकार तबले का एक प्रभावी अंग माना जाता है ।

पेशकार का प्रस्तुतीकरण मन को मुग्ध करने वाला होता है । यह मध्य लय में वादित होता है साथ ही , इसकी चाल अत्यन्त सुन्दर और डगमगाती हुई चलती है ।
वैसे तो पेशकार को संगत में भी बजाया जाता है , परन्तु स्वतन्त्र वादन में यह अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना जाता है । अत : यह एकल वादन की महत्त्वपूर्ण पेशकश मानी जाती है । इस प्रकार ठेके का विकसित रूप पेशकार कहलाता है ।

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इस अध्याय में इतना ही । सप्त स्वर ज्ञान से जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

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