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तबला का घराना परम्परा : Tabla ka Gharana Parampara

तबला का घराना परम्परा

अवनद्ध वाद्य : तबला एवं पखावज का घराना परम्परा

तबला का घराना in hindi अवनद्ध वाद्य : तबला – जिस प्रकार गायन के क्षेत्र में घरानों की परम्परा है , उसी प्रकार वादन शैली की विशेषताओं के आधार पर तबले के भी कई घराने अथवा बाज माने गए हैं ।

अवनद्ध वाद्य के अन्तर्गत तबला एवं पखावज का अध्ययन किया जाता है । इन दोनों वाद्ययन्त्रों के अपने घराने एवं परम्पराएँ हैं । तबला वादकों की विशेषता युक्त परम्परा अथवा वादन शैली को बाज कहा जाता है ।

इसी प्रकार की विशेषताओं एवं विशिष्ट वादन शैलियों की परम्पराओं को आधुनिक समय में घरानों के नाम से सम्बोधित किया जाता है ।

तबले के पंजाब घराने के बारे में कथित है कि इसका विकास स्वतन्त्र रूप से हुआ था । पंजाब के सुप्रसिद्ध पखावजी व तबला वादक हुसैन बख्श खाँ के पुत्र फकीर बख्श खाँ ने पंजाब घराने की नींव डाली ।

वर्तमान समय में तबलावादकों के मुख्य रूप से छः घराने माने जाते हैं , जो इस प्रकार हैं –

वादन का अध्ययन विश्लेषण

गायन के घराने और उनकी विशेषताएं Gharanas of Singing

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