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वीणा वाद्य यंत्र का परिचय – Veena Vadya Yantra ka Parichay

वीणा वाद्य यंत्र

वीणा वाद्य यंत्र – वीणा भारत का ऐतिहासिक प्राचीनतम वाद्ययंत्र है जो ( वाद्य यंत्रों के प्रकार वर्गीकरण Musical instrument’s Classification ) में तत वाद्यों की श्रेणी में आता है । एक से सौ तार तक वाली वीणाओं की चर्चा भारतीय शास्त्रों में मिलती है । दक्षिण भारत में इसका विशेष प्रचार है ।

वीणा में कितने तार होते हैं?

वीणा में तारों की संख्या 7 होती है ।

वीणा बजाते समय उंगलियों में क्या पहना जाता है?

लोहे की मिजराब ( कोण ) पहना जाता है ।

वीणा का परिचय

वीणा वाद्य यंत्र के प्रकार

उत्तर भारतीय वीणा के ऊपर वाले तुंबे को बाएँ कंधे पर रखकर वीणा वादन किया जाता है । नीचे का तुम्बा सीधे घुटने पर रहता है । बाएं हाथ की उंगलियों को पदों पर दबाकर वादन किया जाता तथा कनिष्ठिका उंगली को प्राय : बाई ओर के मुक्त तारों को छेड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है । सितार की भाँति सीधे हाथ की तर्जनी और मध्यमा उंगलियों में लोहे की मिजराब ( कोण ) पहनकर स्वराघात किए / बजाये जाते हैं ।

दक्षिण भारतीय वीणा की अपेक्षा उत्तर भारतीय वीणा के मिलाने की पद्धति भिन्न प्रकार की होती है । इसे ‘ रुद्रवीणा ‘ भी कहते हैं ।

जो वीणा जमीन पर रखकर बजाई जाती है और जिसमें बाएं हाथ की उंगलियों के स्थान पर बट्टे ( रॉड ) का प्रयोग किया जाता है उसे ‘ बट्टा बीन ‘ या विचित्र वीणा ‘ कहते हैं और यह भी उत्तर भारत में ही प्रचलित है । इसमें लगभग एक दर्जन तरब के तार होते हैं जो ऊपर के स्वरों के साथ गुंजित होते रहते हैं । विचित्र वीणा को ‘ स्वर वीणा ‘ भी कहते हैं । वीणा को बीन भी कहते हैं और वीणा – वादक को बीनकार या वैणिक

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सेनीय घराने के प्रवर्तक विलास खाँ द्वारा रुद्रवीणा का प्रचार भी काफी हुआ लेकिन अब उसकी उतनी लोकप्रियता नहीं रह गई है ।

वीणाओं के अन्य प्रकारों में उनके आकार – प्रकार एवं तंत्रियों के भेद से एक तंत्रीवीणा , कच्छपीवीणा , आलापिनीवीणा , कलावतीवीणा , कात्यायनी वीणा , किन्नरीवीणा , घोषवतीवीणा , चित्रावीणा , त्रितंत्रीवीणा , शततंत्रीवीणा , दारवीवीणा , ध्रुववीणा , नकुलीवीणा , नारदवीणा , नि : शंकवीणा , पिनाकीवीणा , परिवादिनीवीणा , बृहतीवीणा , भरतवीणा , ब्रह्मवीणा , महतीवीणा , रावणहस्तवीणा , वल्लकीवीणा , विपंचीवीणा , शारदीयवीणा , शाीवीणा , श्रुतिवीणा , सरोदीचीणा , सारंगवीणा , तुम्बरुवीणा , मायूरीवीणा , किरातवीणा , नन्दिकेश्वरवीणा इत्यादि वीणा भी होती हैं ।

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दाक्षिणात्य वीणा वाद्य यंत्र

दाक्षिणात्य वीणा इसे ‘ तंजौर वीणा ‘ भी कहते हैं जो दक्षिण भारत में प्रचलित है ।

गोट्टुवाद्यम या महानाटकवीणा

दक्षिण की सरस्वती वीणा का रूप ही उत्तर भारत का सितार है ।

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वाद्य यंत्र वीणा बजाने की स्थिति Method

वीणा बजाने के लिए मुख्यत : तीन स्थितियाँ पाई जाती हैं ।

प्रत्येक स्थिति में बाएं हाथ से सारिकाओं पर वादन किया जाता है और दाएँ हाथ से मिज़राब , नखी या कोण के द्वारा तारों पर आघात किया जाता है ।

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निम्नलिखित का प्रदर्शन वीणा के द्वारा सर्वश्रेस्ट होता हैमींड, सूत , गमक , घसीट , श्रुतियों और तानों का जितना अच्छा प्रदर्शन वीणा के द्वारा हो सकता है उतना अन्य किसी वाद्य के द्वारा सम्भव नहीं होता । 

इस लेख में बस इतना ही । सप्त स्वर ज्ञान से जुड़ने के लिए धन्यवाद ।

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