Site icon सप्त स्वर ज्ञान

प्रयाग संगीत समिति – Prayag Sangeet Samiti

प्रयाग संगीत समिति

प्रयाग संगीत समिति – इलाहाबाद ( प्रयाग )

प्रयाग संगीत समिति – यह भारत का एक प्रमुख संगीत शिक्षण संस्थान है , जोकि इलाहाबाद ( प्रयाग ) में स्थित है। 

प्रयाग संगीत समिति की स्थापना कब हुई?

उत्तर – वर्ष 1926 को। स्व . पं . विष्णु दिगम्बर पलुस्कर के शिष्य ‘ बी . ए . कशालकर जी ने ‘ नारदाचे मिशन ‘ से प्रेरणा लेकर ‘ प्रयाग संगीत समिति ‘ की स्थापना की।

पंडित विष्णु दिगंबर ने अपने शिष्य कशालकर को बतौर शिक्षक प्रयागराज भेजकर यहां शास्त्रीय संगीत की शिक्षा शुरू कराई थी।

• यह संस्था सम्पूर्ण उत्तर भारत में संगीत वाद्ययन्त्र , लोककला , क्षेत्रीय संगीत विधा को जोड़ते हुए समन्वय का प्रयास कर रही है । • इस संस्था ने राज्य विश्वविद्यालय, माध्यमिक स्तर की शैक्षणिक गतिविधियों में संगीत को शिक्षा का माध्यम देने का प्रयास किया है ।

• वर्ष 2007 से यह समिति, संगीत से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के डिप्लोमा का संचालन कर रही है ।

Advertisement

• देश के विभिन्न भागों तथा विदेशों में ; जैसे – इंग्लैण्ड , अमेरिका , नेपाल आदि में अनेक परीक्षा केन्द्रों के माध्यम से विभिन्न स्तर का डिप्लोमा एवं डिग्री प्रदान कर रही है।

• समिति की परीक्षा का कार्य कुशल एवं सुशिक्षित कलाकारों के माध्यम से किया जाता है।

Advertisement
Advertisement

• समिति का विशिष्ट उद्देश्य प्रतियोगिता एवं सम्मेलन के माध्यम से देश एवं विदेश के कलाकारों की पहचान बनाना है।

• वर्तमान समय की हम बात करें तो , प्रतिवर्ष प्रयाग संगीत समिति में राष्ट्रीय स्तर की उपशास्त्रीय, शास्त्रीय और सुगम संगीत, वाद्य संगीत व नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

Advertisement

• इस आयोजन में पूरे देश से 4 वर्ष से लेकर 30 वर्ष तक के आयु वर्ग के 500 से ज्यादा प्रतियोगी भाग लेते हैं। विजेताओं को पुरस्कृत भी किया जाता है।

• इसके अलावा 4-5 दिनों का राष्ट्रीय संगीत सम्मेलन भी होता है जिसमें कई प्रख्यात कलाकारों को आमंत्रित किया जाता है।

Advertisement

पाठ्यक्रम

प्रयाग संगीत समिति द्वारा संगीत के आठ पाठ्यक्रमों की शिक्षा दी जाती है।

परीक्षा में उत्तीर्ण छात्र को प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। इसमें दो वर्षीय जूनियर डिप्लोमा होता है।

चार साल का सीनियर डिप्लोमा होता है।

छह वर्ष का संगीत प्रभाकर होता है।

Advertisement

आठ वर्ष का संगीत प्रवीण होता है और संगीत में शोध कार्य ( Thesis Work ) पूरा करने के बाद विद्यार्थी को संगीताचार्य की उपाधि दी जाती है।

समिति के अनुसार संगीत समिति की प्रभाकर और प्रवीण की डिग्री क्रमश: बीए म्यूजिक और एमए म्यूजिक के समकक्ष मानी जाती है।

Advertisement

केवल संगीत से जुड़ी इसी तरह की ज्ञानवर्धक लेखों के लिए , कृपया सब्सक्राइब करें , शेयर करें और बने रहें सप्त स्वर ज्ञान के साथ । अब तक जुड़े रहने के लिए आपका धन्यवाद ।

Advertisement
Advertisement
Share the Knowledge
Exit mobile version