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हिमाचल प्रदेश का लोकगीत-Folk Song / Lokgeet Himachal

हिमाचल प्रदेश का लोकगीत

हिमाचल प्रदेश का लोकगीत

हिमाचल प्रदेश का लोकसंगीत ‘ हरे – भरे खेत , हिम शिखरों से सुसज्जित ऊंचे घने वृक्ष , स्वच्छ कल – कल बहती नदियाँ , हिमाचल प्रदेश का अद्वितीय श्रृंगार है । इसके अनुरूप यहाँ के बहुरंगी लोकगीत है ।

लोकगीत विशेष अवसरों पर तो गाए ही जाते हैं । साथ ही दैनिक जीवन में गूंजती यहाँ की स्वर लहरियाँ मन को आनन्द विभोर कर देती हैं । हिमाचल प्रदेश के गीतों को ‘ नाटी ‘ भी कहा जाता है । अधिकांश नारियाँ नृत्य गीत गाती हैं ।

हिमाचल का लोकगीत आज भी ग्रामीण समुदाय के मनोरंजन का साधन है । हिमाचल प्रदेश के प्रमुख लोकगीतों में बुढडमामा , बरलाज , छींजे आदि हैं । 

स्वांग गीत

स्वांग गीत – हिमाचल प्रदेश में स्वांग तथा रासलीला का विशेष प्रचलन है । यहाँ प्रत्येक त्यौहार तथा मेलों के अवसरों पर इनका आयोजन होता है । हिमाचल प्रदेश में वैवाहिक संस्कारों के अवसर पर मांगलिक स्वांग गाए जाते हैं , जिन्हें झमाकड़ा – मझाकड़ा स्वांग कहते हैं । यह मूलत : स्त्रियों का स्वांग है ।

इस स्वांग में स्त्रियाँ विवाह की प्रारम्भिक तैयारी से लेकर विदाई तक सभी प्रथाओं पर नृत्य गीत एवं भाव – अभिनय के साथ सामूहिक हर्षोल्लास अभिनीत करती हैं । वर पक्ष के लोगों में झमाकड़ा स्वांग तथा दुल्हन पक्ष के यहाँ मझाकड़ा स्वांग की प्रथा है । विवाह जैसे मांगलिक संस्कार पर झमाकड़ा – मझाकड़ा मनोरंजन का विशिष्ट साधन है ।

उत्सव गीत

उत्सव गीत – हिमाचल प्रदेश में उत्सव एवं त्यौहार प्रेम – दर्शनीय हैं । सर्वप्रथम चैत्रमास से पहाड़ी लोकोत्सवों का शुभारम्भ होता है तथा इन मेलों में स्वांग खेले जाते हैं , जिनमें प्रमुख स्वांग हैं – चैबोल खोन , होरिगको , रली , बसोह , भेड़ , मुन्नी आदि । हिमाचल प्रदेश का लोकजीवन लोकगीतों , लोकनाट्य से परिपूर्ण है । यहाँ प्रत्येक पर्व एवं उत्सवों पर लोकगीतों एवं गान की परम्परा है ।

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हिमाचल प्रदेश एक विस्तृत प्रदेश है । आज भी इसका अत्यन्त विस्तृत परिवेश यहाँ के जन – जीवन में साम्य लाने में एक अवरोध – सा बना . हुआ है ।

यहाँ के प्रत्येक जनपद में निजी सामाजिक आस्थाएँ , सांस्कृतिक चलन तथा नैतिक मापदण्ड हैं , जो यहाँ के जनपदीय लोकगीतों में सहज ही प्राप्य हैं ।

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