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ताल किसे कहते हैं ? Taal की उत्पत्ति कैसे हुई ?

ताल किसे कहते हैं ?

ताल किसे कहते हैं ?

ताल किसे कहते हैं ?संगीत रत्नाकर के अनुसार , ताल की परिभाषा इस प्रकार है –

तालस्तस्य प्रतिष्ठायामिति धातोधर्मि स्मृतः ।
गीतं वाद्यं तथा नृत्यं यतस्ताले प्रतिष्ठतिम् ।।

अर्थात् शारंगदेव कृत संगीत रत्नाकर में ताल शब्द की व्युत्पत्ति बताते हुए कहा है कि तिष्ठा अर्थ वाली धातुओं में धातु प्रत्यय के संयोग से ताल शब्द निर्मित होता है । गीत , वाद्य एवं नृत्य इसमें प्रतिष्ठित होते हैं , इस कारण इसे ताल कहा जाता है ।

ताल की उत्पत्ति कैसे हुई ?

अतः हम यह कह सकते हैं कि ताल के अनुसार ही गेय रचना बनाई जाती है अथवा रचना के अनुरूप ताल उसके साथ बजाई जाती है । ताल वाद्यों के बोलों को लेकर ऐसा वर्ण समूह बना दिया जाता है , जिसको गिनने से जितनी मात्राएँ करती है । आती हैं उसके साथ रचना भी उतनी ही मात्राओं से युक्त गाई जाती है । अतः ताल किसी भी सांगीतिक रचना को आधार प्रदान करके सुव्यवस्थित रूप प्रदान करती है ।

इस अध्याय ” ताल किसे कहते हैं ? ” में बस इतना ही । सप्त स्वर ज्ञान से जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद ।

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