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लयकारी की परिभाषा क्या है ? कुआड़ क्या है ?Layakari

लयकारी

लयकारी की परिभाषा (Layakari Definition)

लयकारी का सम्बन्ध ताल से है , तबला, ढोलक, इत्यादि वाद्य यन्त्र जिनका उपयोग ताल देने के लिए होता है । गायक को भी ताल में ही गाना होता है ।

भारतीय संगीत में लयकारी क्या है ? What is Layakari in Indian Music in Hindi ? लयकारी का मतलब क्या है ?

गायक गाने के समय अथवा वादक बजाते वक्त सर्वप्रथम एक लय निश्चित करता है और तत्पश्चात अपनी कलात्मक साधना का परिचय देता है । आवश्यतानुसार कभी वह एक मात्रा में एक स्वर, कभी एक में दो स्वर और कभी तीन स्वर गाता है, तो कभी वह दो मात्रा में तीन स्वर अथवा चार मात्रा में पाँच स्वर उच्चारित करता है । इस प्रकार की वह अनेक क्रियाएं करता है । संगीत में इस क्रिया को लयकारी कहते हैं ।

लयकारी का नामकरण

लयकारी का नामकरण – एक मात्रा में गाये – बजाये जाने वाले मात्राओं के आधार पर होता है । 1 मात्रा में जितनी मात्रायें बोली जाती हैं , उसी संख्या के आधार पर लयकारी का नामकरण होता है , उदाहरणार्थ 1 मात्रा में 3 मात्रा आने वाली लयकारी तिगुन कहलाती है, और 2 मात्रा में 3 की लयकारी 3/2 गुन कहलाती है ।

गणित द्वारा लयकारी के अनेक प्रकार सम्भव हैं , किन्तु क्रियात्मक संगीत (Practical Music) में सभी का प्रयोग नहीं होता । हम यहाँ पर प्रयोग की जाने वाली मुख्य लयकारियों पर प्रकाश डाल रहे हैं ।

प्रयोग की जाने वाली मुख्य Layakari

  1. एक गुन अथवा बराबर की लय – एक मात्रा में एक ।
  2. दुगुन अथवा दो गुन – एक मात्रा में दो ।
  3. आधी गुन – दो मात्रा में एक ।
  4. तिगुन – एक में तीन ।
  5. चौगुन – एक में चार ।
  6. पाँच गुन – एक में पाँच ।
  7. छः गुन– एक में छः । इस प्रकार से सातगुन , आठगुन इत्यादि अनेक लयकारियाँ हो सकती हैं ।
  8. 11/2 – गुन अथवा 3/2 गुन- एक मात्रा में 1/2 मात्रायें अथवा दो मात्राओं में तीन मात्रायें बोलना । इसे आड़ भी कहते हैं । आड़ के 2 अर्थ होते हैं । सामान्य अर्थ में कोई भी टेढ़ी लयकारी जैसे 1 में 3 , 2 में 3 , 3 में 4 , 4 में 5 इत्यादि लयकारियाँ आड़ कहलाती हैं । विशेष अर्थ में केवल डेढ़ गुन की लयकारी आड़ कहलाती है । यह तिगुन की आधी होती है ।
  9. 2/3 गुन – तीन मात्रा में दो ।
  10. 4/3 गुन – तीन मात्रा में चार ।
  11. 3/4 गुन अथवा पौन गुन – चार मात्रा में तीन ।
  12. 5/4 गुन अथवा सवा गुन – चार मात्रा में पाँच मात्रा बोलना , जिसे कुआड़ भी कहते हैं ।

कुआड़ के अर्थ में भी दो मत हैं । प्रथम मतानुसार सवा गुन कुआड़ कहलाती है और द्वितीय मतानुसार आड़ की आड़ कुआड़ कहलाती है । आड़ की आड़ 3/2 × 3/2= 9/4 गुन होगी जिसका अर्थ है 4 मात्रा 9 मात्रा ।

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उपरोक्त तरीके को देखते हुए मान ले कि इस प्रकार तीन , चार , पाँच , छः अथवा सात मात्राओं में एक स्वर बोला जा सकता है , किन्तु ऐसी लयकारियाँ केवल गणित द्वारा ही सम्भव हैं, साधारणतया इनका प्रयोग नहीं होता ।

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